बुधवार, 11 जुलाई 2018

कविता

जाननेवाला
तुम्हें मेरे गालों,
मेरे बालों की चमक दिखाई देती है
चेहरे पर मासूमियत, उम्र पर विजय पा चुकी त्वचा,
कमनीय देहयष्टि दिखाई देती है
पर, आंखों की उदासी, अनकहे शब्द
जिसे मैं चाहती हूं तुम पढ़ लो
बिना कहे,
एक बार भी दिखाई नहीं देती,
कैसे मनाऊं मन को
कोई है, मुझे जाननेवाला भी.



- तरु श्रीवास्तव

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें