देशभक्ति गीत
ये देश हमारा है, हमको ये प्यारा है
दुनिया से निराला है, हम सबका दुलारा है.
जहां कोयल गाती हैं, पंचम की बोली में
ऋतुएं जहां आती हैं, रागों की डोली में.
उगते सूरज को हम, जहां अर्ध्य चढ़ाते हैं
डूबते सूरज को भी, जल हम ही चढ़ाते हैं.
कई धर्म जहां जन्मे, कई धर्मगुरु जन्मे
कई भाषा जहां जन्मी, कई भाषी जहां बसते.
दुनिया में कहां किसी को, इतना मान मिलता है
घर आये अतिथि को, सम्मान मिलता है.
पावों को धोना भी जहां भाग्य समझते हैं
घर आये अतिथि को, भगवान समझते हैं.
हर वस्तु को पूजा है, सुख जिसने हमको दिया
नदियां-सागर को भी, मां-पिता है हमने कहा.
संसार को सर्वप्रथम, शिक्षा इसने दी है
जो आया शरण इसके, भिक्षा इसने दी है.
युग-युग के बंधन भी, जहां माने जाते हैं
पत्थर में ध्यान लगा, भगवान को पाते हैं.
बस एक ही इच्छा है, हर बार जनम लें हम
हर बार मिले धरती, भारत ही अंकित हो.
- तरु श्रीवास्तव
ये देश हमारा है, हमको ये प्यारा है
दुनिया से निराला है, हम सबका दुलारा है.
जहां कोयल गाती हैं, पंचम की बोली में
ऋतुएं जहां आती हैं, रागों की डोली में.
उगते सूरज को हम, जहां अर्ध्य चढ़ाते हैं
डूबते सूरज को भी, जल हम ही चढ़ाते हैं.
कई धर्म जहां जन्मे, कई धर्मगुरु जन्मे
कई भाषा जहां जन्मी, कई भाषी जहां बसते.
दुनिया में कहां किसी को, इतना मान मिलता है
घर आये अतिथि को, सम्मान मिलता है.
पावों को धोना भी जहां भाग्य समझते हैं
घर आये अतिथि को, भगवान समझते हैं.
हर वस्तु को पूजा है, सुख जिसने हमको दिया
नदियां-सागर को भी, मां-पिता है हमने कहा.
संसार को सर्वप्रथम, शिक्षा इसने दी है
जो आया शरण इसके, भिक्षा इसने दी है.
युग-युग के बंधन भी, जहां माने जाते हैं
पत्थर में ध्यान लगा, भगवान को पाते हैं.
बस एक ही इच्छा है, हर बार जनम लें हम
हर बार मिले धरती, भारत ही अंकित हो.
- तरु श्रीवास्तव
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