बदली हवा
कल हवा जाे चली, कुछ बदली लगी
वो अपनी नहीं कुछ परायी लगी
खिड़कियां बंद कर ली, ना घर से गये
इस बदली हवा से हम डर से गये.
कल हवा जाे चली------------------.
डर जिसका था आखिर वही हो गया
हम छुप सा गया, मैं प्रकट हो गया
रिश्तों में वो पहली महक ना रही
एक मैं, एक तू की ही दुनिया बनी.
कल हवा जाे चली-----------------.
घटा जाने कैसी यहां छा गयी
संस्कृति उसमें अपनी समाने लगी
मूल्य अपनी धरा के बिखरने लगे
नग्नता नाच अपना दिखाने लगी.
कल हवा जो चली--------------------.
पूर्वजों की बनायी डगर छोड़कर
कौन सी राह पर जाने हम चल पड़े
प्रेम का अर्थ मन का मिलन ना रहा
रूप-यौवन भ्रमर को रिझाने लगी.
कल हवा जो चली---------------------.
अर्थ को इष्ट सब मानने हैं लगे
अर्थ ही संगी-साथी, कुटुम्ब बन चले
झूठ के पांव हर घर, नगर बढ़ चले
सच की परछाईं भी अब डराने लगी.
कल हवा जो चली-----------------.
- तरु श्रीवास्तव
कल हवा जाे चली, कुछ बदली लगी
वो अपनी नहीं कुछ परायी लगी
खिड़कियां बंद कर ली, ना घर से गये
इस बदली हवा से हम डर से गये.
कल हवा जाे चली------------------.
डर जिसका था आखिर वही हो गया
हम छुप सा गया, मैं प्रकट हो गया
रिश्तों में वो पहली महक ना रही
एक मैं, एक तू की ही दुनिया बनी.
कल हवा जाे चली-----------------.
घटा जाने कैसी यहां छा गयी
संस्कृति उसमें अपनी समाने लगी
मूल्य अपनी धरा के बिखरने लगे
नग्नता नाच अपना दिखाने लगी.
कल हवा जो चली--------------------.
पूर्वजों की बनायी डगर छोड़कर
कौन सी राह पर जाने हम चल पड़े
प्रेम का अर्थ मन का मिलन ना रहा
रूप-यौवन भ्रमर को रिझाने लगी.
कल हवा जो चली---------------------.
अर्थ को इष्ट सब मानने हैं लगे
अर्थ ही संगी-साथी, कुटुम्ब बन चले
झूठ के पांव हर घर, नगर बढ़ चले
सच की परछाईं भी अब डराने लगी.
कल हवा जो चली-----------------.
- तरु श्रीवास्तव
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