परिस्थिति
मेट्रो में मेरी बगल की सीट पर साधारण से कपड़े में बैठी महिला ने जैसे ही मुझसे अपने बच्चे के लिए पानी मांगा, मैंने झट पानी का बॉटल बंद कर अपने बैग में रख लिया. महिला ने फिर कहा, 'जरा सा पानी दे दीजिए ना, मेरा बच्चा प्यास से रो रहा है'. लेकिन मैंने बिना उसकी ओर देखे एक झटके में कह दिया, 'नहीं दे सकती' और अपनी सहेली की ओर देख मुस्कुरा दिया. इसके बाद मैं आंखें मूंदकर बैठ गयी. मेरी निष्ठुरता देख कई महिलाएं मुझे बुरा-भला कहने लगीं. मैं चुप सबकी सुनती रही, पर न अपनी आंखें खोली, न कोई जवाब दिया. बच्चा भी चुप हो गया था, शायद किसी ने उसे पानी पिला दिया था. लेकिन महिलाओं का मुझे कोसना जारी था. कुछ देर तो मेरी सहेली चुपचाप सब सुनती रही, लेकिन जब उससे रहा नहीं गया तो वह जोर से चीख पड़ी, 'चुप रहिए आपलोग. इसके फेफड़े में संक्रमण है और पानी जूठा था इसलिए बच्चे को नहीं दिया. लेकिन आप लोगों को तो किसी की परिस्थिति जाने बिना उसे गलत ठहराने की अादत पड़ी हुई है.' मेट्रो में एकदम चुप्पी छा गयी. मैं यथावत आंखें मूंदे बैठी रही.
- तरु श्रीवास्तव
मेट्रो में मेरी बगल की सीट पर साधारण से कपड़े में बैठी महिला ने जैसे ही मुझसे अपने बच्चे के लिए पानी मांगा, मैंने झट पानी का बॉटल बंद कर अपने बैग में रख लिया. महिला ने फिर कहा, 'जरा सा पानी दे दीजिए ना, मेरा बच्चा प्यास से रो रहा है'. लेकिन मैंने बिना उसकी ओर देखे एक झटके में कह दिया, 'नहीं दे सकती' और अपनी सहेली की ओर देख मुस्कुरा दिया. इसके बाद मैं आंखें मूंदकर बैठ गयी. मेरी निष्ठुरता देख कई महिलाएं मुझे बुरा-भला कहने लगीं. मैं चुप सबकी सुनती रही, पर न अपनी आंखें खोली, न कोई जवाब दिया. बच्चा भी चुप हो गया था, शायद किसी ने उसे पानी पिला दिया था. लेकिन महिलाओं का मुझे कोसना जारी था. कुछ देर तो मेरी सहेली चुपचाप सब सुनती रही, लेकिन जब उससे रहा नहीं गया तो वह जोर से चीख पड़ी, 'चुप रहिए आपलोग. इसके फेफड़े में संक्रमण है और पानी जूठा था इसलिए बच्चे को नहीं दिया. लेकिन आप लोगों को तो किसी की परिस्थिति जाने बिना उसे गलत ठहराने की अादत पड़ी हुई है.' मेट्रो में एकदम चुप्पी छा गयी. मैं यथावत आंखें मूंदे बैठी रही.
- तरु श्रीवास्तव
Acchi Kahani
जवाब देंहटाएंdhanyawaad sangeetaji
जवाब देंहटाएं