निराकार उपस्थिति
एक अनसुलझा प्रश्न
हर पल मथता रहता है मुझे
मेरी देह मेरी है या, तुम्हारी
मेरा मन मेरा है या, तुम्हारा
मेरे रोम-रोम,
हर धड़कन पर तुम्हारा पहरा है
तुमसे इतर,
कभी कुछ सोच ही नहीं पाती
सदेह न होते हुए भी
हर पल तुम हो मेरे पास,
मेरे सामने निराकार उपस्थित.
- तरु श्रीवास्तव
एक अनसुलझा प्रश्न
हर पल मथता रहता है मुझे
मेरी देह मेरी है या, तुम्हारी
मेरा मन मेरा है या, तुम्हारा
मेरे रोम-रोम,
हर धड़कन पर तुम्हारा पहरा है
तुमसे इतर,
कभी कुछ सोच ही नहीं पाती
सदेह न होते हुए भी
हर पल तुम हो मेरे पास,
मेरे सामने निराकार उपस्थित.
- तरु श्रीवास्तव
वाह
जवाब देंहटाएंthnx anujaji.
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