सुंदर दुनिया
कितनी सुंदर वो दुनिया है
संघर्ष नहीं जहां जीने में
पीले पत्ते झर जाते हैं
नव पल्लव खिल खिल जाते हैं
इच्छा मेरी भी होती है
एक ऐसी ही दुनिया बनाने की
राहों में निचे बिछ कर हम
अगुआई करें तरुणाई की
तरु श्रीवास्तव
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