प्रेम का अर्थ
बहुत सच है
मैं डूब चुकी हूं तुम्हारे प्रेम में आंकठ
तुम्हारे सामने आते ही खो जाते हैं मेरे शब्द
पसर जाता है मौन का साम्राज्य
शब्दश: पढ़ लेती हूं तुम्हारे मनोभावों को
तभी तो जान पाई हूं तुम्हारी इन चाहों को
नहीं, तुम्हें मुझसे प्रेम नहीं
तुम्हें चाहिए मेरी कमनीय काया
अपनी प्यास बुझाने को
तुम शायद प्रेम का अर्थ नहीं जानते
मेरी भावनाएं नहीं पहचानते
मैं जानती हूं मेरा यह कदम
मुझे ले जायेगा तुमसे बहुत दूर
चाहकर भी नहीं लौट सकूंगी तुम्हारे पास
खिंच जाएगी हमारे बीच एक दीवार
फिर न कर सकूंगी कभी किसी और से प्यार
हां,
यह विरह वेदना स्वीकार्य है मुझे
परंतु, मैं ऐसा नहीं होने दूंगी
नहीं,
मैं प्रेम का अर्थ नहीं खोने दूंगी
नहीं,
मैं प्रेम में वासना की अराधना
नहीं होने दूंगी
नहीं होने दूंगी
नहीं होने दूंगी।
- तरु श्रीवास्तव
बहुत सच है
मैं डूब चुकी हूं तुम्हारे प्रेम में आंकठ
तुम्हारे सामने आते ही खो जाते हैं मेरे शब्द
पसर जाता है मौन का साम्राज्य
शब्दश: पढ़ लेती हूं तुम्हारे मनोभावों को
तभी तो जान पाई हूं तुम्हारी इन चाहों को
नहीं, तुम्हें मुझसे प्रेम नहीं
तुम्हें चाहिए मेरी कमनीय काया
अपनी प्यास बुझाने को
तुम शायद प्रेम का अर्थ नहीं जानते
मेरी भावनाएं नहीं पहचानते
मैं जानती हूं मेरा यह कदम
मुझे ले जायेगा तुमसे बहुत दूर
चाहकर भी नहीं लौट सकूंगी तुम्हारे पास
खिंच जाएगी हमारे बीच एक दीवार
फिर न कर सकूंगी कभी किसी और से प्यार
हां,
यह विरह वेदना स्वीकार्य है मुझे
परंतु, मैं ऐसा नहीं होने दूंगी
नहीं,
मैं प्रेम का अर्थ नहीं खोने दूंगी
नहीं,
मैं प्रेम में वासना की अराधना
नहीं होने दूंगी
नहीं होने दूंगी
नहीं होने दूंगी।
- तरु श्रीवास्तव
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